पन्‍ना – {sarokaar news} सभ्य समाज में दुष्कृत्य जैसे घिनौने अपराधों के लिये कोई जगह नहीं है लेकिन इस प्रकार के घिनौने अपराध हो रहे हैं जो चिंता का विषय है। ऐसे अपराधों को होने न देने का दायित्व कानून से ज्यादा समाज की जिम्मेदारी है, समाज में जागरूकता की कमी होने के बाद भी अदालतें अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर बालिकाओं को हवस का शिकार बनाने वाले अपराधियों को कानून के दायरे में लाकर समाज को अपराधमुक्त बनाने का भरसक प्रयास करतीं है किन्तु समाज की जिमेदारी खत्म नहीं हो जाती है। अगर हमें अपराधमुक्त समाज बनाना है तो समाज को सजग बनाये बिना संभव नहीं है। ऐसे ही एक मामले में बालिका के साथ दुष्कृत्य करने वाले अपराधी को अदालत ने 10 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी जिला ऋषिकांत द्विवेदी ने जानकारी देते हुए कि अभियोक्‍त्री/पीडिता के पिता ने थाना पवई में उपस्थित होकर रिपोर्ट किया कि,दिनांक 02.02.2018 को सुबह 10.30 बजे मेरी पत्‍नी नहाने बारी में चली गई थी जब वह वापस आई तो उसने देखा कि लडकी घर पर नहीं है लडकी की तलाश गांव व रिश्‍तेदारी में करने पर कही पता नहीं चला तब पत्‍नी ने फोन करके मुझे खेत से बुलाया इसके बाद मैने भी गांव में आसपास पता किया लडकी का कही पता नही चला मुझे शक है कि मेरी लडकी को कोई अज्ञात व्‍यक्ति बहला फुसलाकर भगा ले गया है।

फरियादी की उक्‍त रिपोर्ट पर थाना-पवई में अपराध क्र. 28/16 में धारा 363 पर अपराध पंजीबद्ध किया जाकर अपराध विवेचना में लिया जाकर धारा 366ए,376(2)एन,370ए,506 भा.द‍.सं. एवं 3/4,5(एल)/6 लै.अप.से बा.का सं.अधि.का इजाफा कर चालान माननीय न्‍यायालय न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया गया।

प्रकरण की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश (पाक्‍सों) पन्‍ना के न्‍यायालय मे हुआ शासन की और से प्रकरण की सशक्त पैरवी करते हुये श्री दिनेश खरे,प्रभा.जि.लो.अभि.अधि.पन्‍ना, द्वारा साक्षियों की साक्ष्‍य को बिन्दुबार तरीके से लेखबद्ध कराकर न्‍यायालय में आरोपी के विरूद्ध अपराध संदेह से परे प्रमाणित किया गया तथा आरोपी के कृत्‍य को गंभीरतम अपराध मानते हुये माननीय न्‍यायालय से अधिकतम दंड से दंडित किये जाने का निवेदन किया।

जिस पर न्‍यायालय द्वारा अभिलेख पर आई साक्ष्‍यों,अभियोजन के तर्को तथा न्‍यायिक-दृष्‍टांतो से सहमत होते हुए अभियुक्‍त प्रमोद कुमार विश्‍वकर्मा, को धारा 363 भा.द.वि. में 03 वर्ष का कठोर कारावास एवं 01 हजार रूपये का अर्थदण्‍ड.अर्थदण्‍ड के व्‍यतिक्रम पर 01 माह का अतिरिक्‍त कारावास, धारा 376(2एन) भा.द.वि. में 10 वर्ष का कठोर कारावास एवं 10 हजार रूपये का अर्थदण्‍ड.अर्थदण्‍ड के व्‍यतिक्रम पर 06 माह का अतिरिक्‍त कारावास,धारा 506 भाग दो भा.द.वि. 02 वर्ष का कठोर कारावास एवं 01 हजार रूपये का अर्थदण्‍ड व्‍यतिक्रम पर 01 माह का अतिरिक्‍त कारावास,धारा 366क भा.द.वि. के अन्‍तर्गत अपराध का दोषी पाते हुये 05 वर्ष के कठोर कारावास एवं 01 हजार रूपये अर्थदण्‍ड,अर्थदण्‍ड के व्‍यतिक्रम पर 03 माह का अतिरिक्‍त कारावास के दंड से दंडित किया।