बफर ज़ोन स्थित तालाब में डाला गया जहरीला पदार्थ

 तालाब की कई किवंटल मछलियां मरी

बड़ी संख्या में मरी मछलियों की घटना को संचालक बता रहे टोटका

टाइगर रिजर्व के आला अधिकारी घटना पर डाल रहे पर्दा

पार्क के जानवर नहीं हैं सुरक्षित, मौजूदा पार्क प्रबंधन जानवरो को लेकर नहीं है गंभीर

पन्ना – {sarokaar news} पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत अमानगंज कोर एरिया और पन्ना बफर ज़ोन के बीच पड़ने वाले क्षेत्र रमपुरा तालाब में दिनांक 21/04/2019 की दरमियानी रात में खतरनाक पदार्थ डाल दिया गया जिससे तालाब की छोटी बड़ी हज़ारों मछलियां अचानक से मर गयीं। तालाब के किनारे मरी हुई मछलियों का अंबार लग गया। इस घटना के बाद पार्क प्रबंधन हरकत में आया और तालाब में जहरीला पदार्थ मिलाने वाले आरोपी राजेश पिता किलैयां आदिवासी को पकड़कर जेल भेज दिया तथा दूसरा आरोपी मोटर साइकल से भागने में सफल हो गया।

काबिलेगौर है कि कोर एरिया में स्थित तालाब में इतनी बड़ी तादाद में छोटी बड़ी मछलियां जहरीला पदार्थ मिलाने मर जाती हैं, अगर समय रहते घटना का पता नहीं चलता और पार्क के अन्य जानवर दूषित पानी पीते तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी बड़ी घटना घटित हो सकती थी। तालाब कोर एरिया में होने के कारण टाइगर भी इस तालाब का पानी पीने के लिए अक्सर आता है। मारी गई हज़ारों मछलियों के कारण तालाब के आसपास बदबू फैलने लगी इससे निपटने के लिए पार्क प्रबंधन द्वारा मरी हुई मछलियों को लगभग 200 गड्ढे खोदकर गाड़ा गया तथा कुछ मछलियों को जलाकर नष्ट किया गया।

इस घटना से पता चलता है कि पन्ना टाइगर रिजर्व के अंदर टाइगर सहित वन्यजीव सुरक्षित नहीं है। मौजूदा पार्क प्रबंधन जानवरों की सुरक्षा को लेकर बिलकुल भी संजीदा नहीं है अगर पार्क प्रबंधन का यही रवैया रहा तो पार्क अपने पुराने इतिहास को दोहरा सकता है। एयर कण्डीशनों में बैठकर पार्क को संचालित करने वाले अधिकारी जानवरों की सुरक्षा नहीं कर सकते हैं। पार्क को बचाये रखने के लिए जमीन पर काम करने की आवश्यकता होती है जो मौजूदा प्रबंधन में नहीं है।

वर्तमान पार्क प्रबंधन को अपने पुराने अधिकारी आर श्रीनिवास मूर्ति से सबक लेते हुए जमीनी स्तर पर कैसे काम किया जाये सीखने की जरुरत है। उन्होंने बाघ विहीन हो चुके पन्ना टाइगर रिज़र्व को अपनी कड़ी मेहनत और जमीनी कर्मचारियों से साथ बेहतर तालमेल स्थापित कर पन्ना टाइगर रिज़र्व परिवार बनाया और पार्क को बाघों से आबाद कर बेहतरीन नमूना पेश किया। आर श्रीनिवास मूर्ति के स्थानांतरण के बाद से पार्क को अभी तक उनका उत्तराधिकारी नहीं मिल पाया है जो उनकी विरासत की सही देखभाल कर सके। मौजूदा पार्क प्रबंधन पार्क के जानवरों की सुरक्षा और उनके संरक्षण तथा संवर्धन के प्रति उदासीन है। परिणाम स्वरुप ऐसी घटना घटित हो रही हैं। 2009 में मड़ला रेंज पार्क एरिया में जहर डालकर मछली मारने का एक प्रकरण सामने आया था जिसमे 12 किलो मछली मरी थीँ तब तत्कालीन क्षेत्र संचालक आर श्रीनिवास मूर्ति ने वनरक्षक राम रतन नापित को जेल भेज दिया था।

आज कोर एरिया के तालाब में जहरीला पदार्थ मिलाकर पार्क के जानवरों के अस्तित्व पर हमला हो रहा है और प्रबंधन घटना पर पर्दा डालकर मामले को दबाने का प्रयास कर रहा है। तालाब में जहरीला पदार्थ मिला देने से कई किवंटल मछलियां मर जातीं है जिसको पार्क प्रबंधन मामूली घटना बताकर रफादफा करना चाहता है। प्रबंधन सोची समझी साजिश के तहत सैकड़ों किलो मारी गयीं मछलियों को महज कुछ किलो बताकर अपने नाकारापन को छुपाने का प्रयास कर रहा है। किसके अपराध अथवा कोताही को छुपाने का हो रहा प्रयास। एहतियात के तौर पर पार्क प्रबंधन द्वारा तालाब के इर्द गिर्द लोगों को तैनात कर दिया है ताकि टाइगर दूषित पानी न पी सके। इस घटना ने पार्क प्रबंधन के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान जरूर खड़े कर दिए हैं।

पन्ना टाइगर रिज़र्व क्षेत्र संचालक, के एस भदौरिया – कोई जहरीला पदार्थ नहीं मिलाया गया है कोई टोटका वगैरह है मछली विभाग ने जहरीला पदार्थ की बात नहीं कही है एक ही प्रजाति की मछलियां मरने का कारण गर्मी अथवा पानी बरसना भी हो सकता है मेरे साथ चलो फिर बताओ किसने कहा है कि डेट वाली मछली मरी है ए.डी.साहब ने मुझे जो फोटो भेजी है उसमें एक तगारी तसला मछली देख रही है जांच रिपोर्ट का प्रमाण पत्र मिल जाए इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटना का प्रेस नोट जारी नहीं हुआ यह हमारी गलती है प्रेस नोट जारी करवाते हैं। घटना को हम तब तक बड़ी घटना नहीं कह सकते जब तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आती है।

देखें फोटो :- 

 

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