पन्ना जिला में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर कोर्ट का आदेश

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कोर्ट का कलेक्टर,एसपी को आदेश, राजस्व, खनिज, पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारियों का संयुक्त उडनदस्ता बनाकर करें कार्रवाई

{sarokaar news} – पन्ना मध्य प्रदेश, रेत के अवैध उत्खनन के कारण प्रदेश का पिछड़ा जिला पन्ना खासा चर्चित हुआ है। सरकारी संरक्षण में यहाँ पर हुये रेत के अवैध उत्खनन ने जीवनदायिनी केन नदी की जैव विविधता के साथ साथ कृषि भूमि को भी नष्ट कर रेत का अवैध उत्खनन किया गया। सरकार और अफसरशाही के इशारे पर करोड़ों रूपए की कीमत की रेत को नियम कानून को दरकिनार कर नदियों से निकालकर मालामाल हो गये। सत्ता और विपक्ष की सांठगांठ से जिले की प्राकृतिक संपदा को दोनों हाथों से लूटा गया। सत्ताधारियों की चाकरी कर रहे जिला प्रशासन ने पूरी निष्ठा के साथ इस लूट में भागीदारी करते हुये राजनेताओं की कृपा पात्रता के साथ साथ रेत के खेत में छक कर अपना पेट भरा। अभी हाल में हाईकोर्ट ने पन्ना जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर संजय मिश्र को कड़ी फटकार लगाते हुये पर गंभीर टिप्पणी करते हुये उन्हें पॉलिटिकल एजेंट बताया था। भारी संख्या में अवैध रेत परिवहन के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो गयीं और मानव जीवन पर संकट देखते हुये समाजसेवी अधिवक्ता राजेश दीक्षित ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को दृष्टिगत रखते हुये इस मामले को 2019 में पन्ना जिला लोकोपयोगी अदालत में ले गये और मध्य प्रदेश प्रमुख सचिव को पार्टी बनाया। दिनाँक 25/8/2022 को अध्यक्ष/जिला न्यायधीश श्री राजेंद्र कुमार पाटीदार, न्यायालय लोकोपयोगी सेवायें जिला पन्ना मध्य प्रदेश ने महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुये कहा है कि –

आवेदक ने खनिज नीति व अधिनियम का उल्घनन कर पन्ना जिले में अवैध रूप व से बालू रेत का अवैध उत्खन्न कर भारी वाहनों से परिवहन करने से सड़के खराब होने जलीय जीवों का जीवन संकट उत्पन्न होने, जैव विविधता प्रभावित होने, वन भूमि में अवैद्य उत्खनन करने से वन संपदा नष्ट होना बताकर कार्यवाही कराये जाने हेतु आवेदन पेश किया है व समर्थन में समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार पत्रों की प्रतियां पेश की है।
अनावेदक क्रमांक 11 की ओर से नियुक्त व अधिकृत प्रभारी खनिज अधिकारी द्वारा उक्त आवेदन पर लिखित जवाब प्रस्तुत किया है, जिसमें रेत का अवैद्य उत्खनन व अवैद्य परिवहन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध उडनदस्ता दल गठित कर कार्यवाही कर वर्ष 2019 में की गयी कार्यवाही की सूची प्रस्तुत की है जबकि शेष | अनावेदकगण की ओर से न तो जवाब पेश किया गया है और न ही उक्त संबंध में कोई | कार्यवाही किये जाने संबंधी कोई खंडनीय दस्तावेज पेश किये है।
प्रकरण आज दिनांक 25.04.2022 से निरंतर समझौता वार्ता हेतु नियत किया जा रहा है किन्तु सूचना उपरांत अनावेदकगण की ओर से समझौता वार्ता हेतु कोई उपस्थित नहीं, इसलिए त्वरित निराकरण की दृष्टि से आवेदक के प्रस्तुत आवेदन पर तर्क श्रवण किए गये।
विद्वान आवेदक ने तर्क के दौरान प्रस्तुत आवेदन का समर्थन करते हुए कहा कि पन्ना जिले में रेत माफियाओं द्वारा निरंतर बालू रेत का नदियों, वन भूमि आदि से अवैध उत्खनन कर भारी वाहनों से अवैध परिवहन किया जा रहा है जिसकी जानकारी अनावेदकगण को होने के उपरांत भी उनके द्वारा कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की जा रही है, जिससे प्राकृतिक संपदा का विनाश हो रहा है, पर्यावरण संतुलन विगड रहा है, जलीय जीवन का विनाश हो रहा है, शासन को राजस्व की हानि हो रही है तथा अवैध परिवहन से सड़के खराब होने से दुर्घटनाएं हो रही है और अमूल्य मानव जीवन का नाश हो रहा है। इसलिए अनावेदकगण को वैधानिक कार्यवाही करने हेतु आदेश दिया जावे।”
उक्त तर्कों के प्रकाश में आवेदक की ओर से प्रस्तुत आवेदन पत्र व समर्थन में प्रस्तुत समाचार पत्रों की प्रतियों का अवलोकन किया गया। उक्त समाचार पत्रों की प्रतियों में नदी व अन्य स्थान से रेत का अवैध रूप से उत्खनन किये जाने का समाचार सचित्र प्रकाशित किया गया है, जिनसे आवेदक के आवेदन व तर्क को बल प्राप्त होता है। अनावेदक क्रमांक 11 कलेक्टर पन्ना की ओर से नियुक्त प्रभारी अधिकारी खनिज अधिकारी पन्ना द्वारा प्रस्तुत जवाब में पन्ना जिले में रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन पर नियंत्रण व कार्यवाही हेतु राजस्व व पुलिस विभाग का संयुक्त उड़नदस्ता दल गठित कर | अवैध उत्खनन व परिवहन करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध कार्यवाही कर अर्थदण्ड की राशि वसूल करना बताया है और जवाब के साथ माह अप्रैल 2019 से माह नवम्बर 2019 तक अर्थदण्ड वसूली किये गये प्रकरणों की सूची प्रस्तुत की है। किन्तु उसके पश्चात निरंतर कार्यवाही जारी रखी हो ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया तथा उक्त कार्यवाही भी उच्चतम न्यायालय के न्याय दृष्टांत स्टेट ऑफ एन.सी.टी. दिल्ली विरूद्ध संजय क्रिमनल अपील नम्बर 2105 / 2013 में पारित आदेश दिनांक 04.09.2011 व माननीय म.प्र. उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर द्वारा एन.सी.आर.सी. क्रमांक 49338 / 2019 जयंत विरुद्ध स्टेट ऑफ एम.पी. में पारित आदेश दिनांक 11.05.2020 अनुसार नहीं की गयी है।
उक्त न्याय दृष्टांतो में उच्चतम व उच्च न्यायालय ने रेत के अवैध उत्खनन व परिवहन को भा.द.स. की धारा 379 व धारा 4/21 माइंस एण्ड मिनरल्स (डेवलपमेंट एण्ड रेगुलेशन) एक्ट 1957 के तहत संज्ञेय अपराध माना है, इसलिए इस स्थिति में खनिज अधिकारी को रेत का अवैध उत्खनन व परिवहन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध संज्ञेय अपराध में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करवाकर सक्षम न्यायालय में कार्यवाही करवाना था, केवल उक्त अर्थदण्ड वसूली की कार्यवाही को ही संपूर्ण विधिक कार्यवाही नहीं कहा जा सकता।
रेत के अवैध उत्खनन व अवैध परिवहन एक लोकोपयोगी विषय है, क्योंकि अवैध उत्खनन व परिवहन से राष्ट्र की संपत्ति की चोरी होती है, राजस्व का नुकसान होता है, भारी वाहनों से परिवहन करने से जनता की गाढ़ी कमाई से निर्मित सड़क क्षतिग्रस्त होती है, जिसके कारण दुर्घटना होने से अमूल्य मानव जीवन का नाश होता है व जलीय जीवनों का नाश होकर पर्यावरण भी दूषित होता है। अतः उक्त समस्त परिस्थतियाँ को देखते हुए आवेदक की ओर से प्रस्तुत आवेदन स्वीकार किया जाता है व अनावेदक कमांक 11 कलेक्टर पन्ना व अनावेदक क्रमांक 12 पुलिस अधीक्षक पन्ना को यह आदेशित किया जाता है कि वे राजस्व, खनिज, पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारियों का एक संयुक्त उडनदस्ता बनायें और संपूर्ण पन्ना जिले में नदियों, वन क्षेत्र व शासकीय भूमि से रेत माफियाओं द्वारा किये जा रहे रेत के अवैध उत्खनन व अवैध परिवहन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध निरंतर विधि अनुसार कार्यवाही ( भा.द.स. की धारा 379 व माइंस एण्ड मिनरल्स (डेवलपमेंट एण्ड रेगुलेशन) एक्ट 1957 के प्रावधानों के अनुसार) करें।
अधिवक्ता राजेश दीक्षित पन्ना
इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश दीक्षित ने कहा है कि जिलेमेंलम्बे समय से चल रहे अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी रोक लगेगी और राजस्व की हो रही चोरी पर रोक लगेगी। पर्यावरण सुरक्षित होगा तो जैव विविधता विकसित होगी और मानव जीवन पर आसन्न खतरा टलेगा। अब देखना हॉग कि अदालत के आदेश के बाद जिला प्रशासन अवैध उत्खनन और परिवहन पर कितनी प्रभावी रोक लगा पाता है।