ओबीसी एडवोकैट्स वेल्फेयर एसोसिएशन की याचिका खारिज़

शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियों में आरक्षण अधिनियम लागू करने हेतु हाईकोर्ट नही कर सकती सरकार को आदेशित

22 पृष्ट का आदेश पारित कर हाईकोर्ट ने व्यक्त की असमर्थता

शासन चाहे तो कर सकती है आरक्षण नियम लागू :हाईकोर्ट नही कर सकती है निर्देशित

{Sarokaar news} – जबलपुर, मध्यप्रदेश प्रदेश ओबीसी एडवोकेटस वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव राम भजन लोधी द्वारा जबलपुर हाईकोर्ट में एक याचिका क्रमांक 19492/2020 दायर कर सुप्रीम कोर्ट,हाईकोर्ट एवं जिला न्यायलयों तथा निगम एवं मंडलो में नियुक्त किए जाने वाले शासकीय अधिवक्ताओ एवं अन्य अधिवक्ताओ की नियुक्तियों में , मध्यप्रदेश लोकसेवा आरक्षण अधिनियम 1994 के प्रावधान लागू करने की मांग की गई थी । उक्त याचिका में उल्लिखित किया गया था की 1956 से मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में एक भी एससी/एसटी का अधिवक्ता हाईकोर्ट जज के रूप में नियुक्त नही हो सका, इसका प्रमुख कारण यह है कि इस वर्ग को न्यायपालिका में समुचित भागीदारी से प्रारंभिक स्टेज से ही बंचित रखा गया है । विगत 30-35 वर्षो से अधिकांश हाईकोर्ट जज एडवोकेट जनरल ऑफिस में शासकीय अधिवक्ताओ में ही नियुक्तियां की जा रही है, इसलिए ओबीसी/एससी/एसटी वर्ग के योग्य अधिवक्ताओ को शासकीय अधिवक्ताओ के रूप में समुचित अवसर नही दिया जा रहा है । इसलिए शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्ति, में आरक्षण अधिनियम 1994 लागू किया जाना आवश्यक है ।

भारत के संविधान निर्माण समिति,संविधान सभा की डिवेट में स्पष्ट रूप से भारत को एक लोकतंत्र राज्य बनाने के लिए देश मे 8679 जातियों में विभक्त भारत को एक लोकतंत्रात्मक राज्य बनाने के लिए उक्त समस्त जाति वर्ग, को शासन एवं प्रशासन में अनुपातिक भागीदारी सुनिश्ति करने का प्रावधान किया गया है लेकिन आजादी के बाद से देश मे न्यायपालिका में जाति वर्ग तथा परिवार विशेष के ही व्यक्ति हाईकोर्ट एवं सुप्रीमकोर्ट में जज नियुक्त होते आ रहे है जो बहुसंख्यक आवादी (एससी,एसटी,ओबीसी) के हितों के विपरीत असंवैधानिक फैसले/निर्णय कर रहे है । स्वास्थ्य लोकतंत्र के लिए बहुसंख्यक वर्ग के योग्य अधिवक्ताओ को हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट जज बनाने में ग्लास बाल(कांच की दीवार) बना दी गई है । उपरोक्त समस्त बिन्दुओ को याचिका में उल्लिखित किया गया था तथा याचिका की विस्तृत सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल द्वारा दिनांक 7 अप्रेल को की जाकर आदेश हेतु याचिका सुरक्षित रख ली गई थी जिस पर आज दिनांक 29 अप्रेल को 22 पृष्ट का फैसला /निर्णय पारित किया गया है । फैसले में उठे गए मुद्दों से किनारा करते हुए कोर्ट द्वारा साधारण रूप में यह कहते हुए की उक्त आरक्षण नियम लागू करने वास्ते हाईकोर्ट सरकार को आदेशित नही कर सकती, तथा याचिका खारिज कर दी गई ।

ओबीसी एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने उक्त निर्णय के विरूद्ध डिवीजन बैंच में अपील करने का फैसला लिया है । याचिका कर्ता एसोसिएशन की ओर से पैरवी अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर,विनायक शाह,उदय कुमार,प्रशांत चौरसिया,विष्णु पटेल,गंगाराम साकेत,परमानंद साहू,अञ्जनी कोरी,ओमप्रकाश पटेल,रूप सिंह मरावी ने पैरवी की ।