शहर में मिलावटी दूध की बिक्री पर रोकथाम के लिये जाना पड़ता है अदालत

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जिला में प्रशासनिक लचरता का खामियाजा भुगत रहे आमजन

प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन समाजसेवियों को करना पड़ रहा है 

{sarokaar news} – पन्ना, जैसा कि हम जानते हैं कि वकालत एक पेशा है, यह कोई व्यवसाय नहीं और इस पेशे का उद्देश्य, लोगों की सेवा करना है। कानूनी पेशा अपनाने वाले व्यक्तियों पर, समाज में कानून के शासन को बनाए रखने की एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा करते हुए एक वकील को न्याय, निष्पक्षता, इक्विटी के सिद्धांतों का ध्यान रखना होता है, जिसको पन्ना के वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश दीक्षित चरितार्थ कर रहे हैं। जब शासन और प्रशासन आमजन के संविधान प्रदत्त अधिकारों से आमजन को वंचित करते हैं तो अधिवक्ता राजेश दीक्षित अदालत में मामला लेकर जाते हैं और आमजन के अधिकारों की रक्षा करते हैं। श्री दीक्षित द्वारा अब तक कई मामलों को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाकर आमजन के मूलभूत अधिकारों का संरक्षण किया गया है।
मिलावटी दूध की बिक्री पर रोक लगाने और दुग्ध व्यसायियों द्वारा मनमाने तरीके से बढ़ाये गये दामों पर प्रभावी रोक लगाने के लिये अधिवक्ता राजेश दीक्षित ने लोकोपयोगी अदालत में वाद प्रस्तुत कर आमजन के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ पर पन्ना कलेक्टर सहित पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, खाद्य एवं औषधि निरीक्षक, मुख्य नगर पालिका अधिकारी पन्ना को पार्टी बनाकर शहर में मिलावटी दूध की बिक्री पर रोक लगाने के लिये अदालत के समक्ष अपने न्याय संगत तर्कों को रखा।
अध्यक्ष / जिला न्यायालय लोकोपयोगी सेवायें जिला पन्ना म.प्र. न्यायधीश श्री राजेन्द्र कुमार पाटीदार ने लोकहित में महत्वपूर्ण निर्णय देते हुये कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह अधिकार है कि उसे शुद्ध व गुणवत्तापूर्ण तथा मिलावट रहित दूध प्राप्त हो, जिससे कि उनका तथा छोटे बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित न हो। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 में भी यह प्रावधान है कि खाद्य निरीक्षक अपमिश्रित खाद्य प्रदार्थ विक्रय करने वालों के विरूद्ध विधि अनुसार कार्यवाही करे।
पन्ना जिले के दूध विक्रेताओं द्वारा दूध की कीमतें मनमाने तरीके से बढ़ाकर 55 से 60 रुपये प्रति लीटर करने व मानक गुणवत्तानुसार दूध का विक्रय न कर मिलावटी दूध विक्रय करने से जिले के नागरिकों को स्वास्थ्य खराब होना बताकर उक्त दूध विक्रेताओं के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने हेतु आवेदन पेश किया है। आवेदन में प्रस्तुत तथ्यों का समर्थन करते हुए व्यक्त किया, अनावेदकगण विधि अनुसार दूध की कीमतें तय करें व मिलावटी व अमानक स्तर का दूध विक्रय न हो इस संबंध में नियमित रूप से सेम्पल लेकर मिलावटी दूध विक्रय करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध विधि अनुसार कार्यवाही करें आवेदक ने उक्त संबंध में पत्रिका समाचार पत्र में दिनांक 28.11.2018 को प्रकाशित खबर की फोटोकॉपी भी पेश की। अनावेदक कमांक 3 ने उक्त संबंध में उनके कार्यालय के खाद्य निरीक्षकों द्वारा नियमित रूप से कार्यवाही करना बताया, लेकिन आवेदक की ओर से आवेदन प्रस्तुति दिनांक के पश्चात खाद्य निरीक्षकों द्वारा दूध के नमूने लेकर कार्यवाही संबंधी कोई जानकारी प्रस्तुत नहीं की। शेष अनावेदकगण की ओर से भी मिलावटी व अमानक स्तर के दूध को विकय करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध विधि अनुसार कार्यवाही करने हेतु सहमति व्यक्त की। चूंकि प्रत्येक नागरिक का यह अधिकार है कि उसे शुद्ध व गुणवत्तापूर्ण तथा मिलावट रहित दूध प्राप्त हो, जिससे कि उनका तथा छोटे बच्चों का स्वास्थ्य प्रभावित न हो। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 में भी यह प्रावधान है कि खाद्य निरीक्षक अपमिश्रित खाद्य प्रदार्थ विक्रय करने वालों के विरूद्ध विधि अनुसार कार्यवाही करे। आवेदक की ओर से दूध विक्रेताओं द्वारा मनमाने तरीके से दूध का भाव तय करने व अपमिश्रित दूध विक्रय करना बताया है और उसके समर्थन में समाचार पत्रों की फोटोकॉपी भी पेश की है। अनावेदक कमांक 3 की ओर से उक्त संबंध में कोई कार्यवाही की गयी हो ऐसा कोई सुसंगत दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया तथा शेष अनावेदकगण की ओर से खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधान अनुसार कार्यवाही किये जाने हेतु सहमति व्यक्त की।
अतः उक्त समस्त परिस्थितियों में पन्ना जिले के प्रत्येक नागरिक को उचित दर पर मानक स्तर का अपमिश्रित दूध प्राप्त हो और उनके तथा छोटे बच्चों के स्वास्थ्य खराब न हो इसे देखते हुए आवेदक की ओर से प्रस्तुत ओवदन स्वीकार किया जाता है व अनावेदक क्रमांक 3 को आदेशित किया जाता है कि वे नियमित रूप से पन्ना जिले में उनके अधिनस्थ कार्यरत खाद्य अधिकारियों से दूध विक्रेताओं से दूध से नमूने लेकर जांच करें व अपमिश्रित व अमानक दूध विक्रय करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के प्रावधानों के अनुसार सक्षम न्यायालय में कार्यवाही करावे।
शेष सभी अनावेदकगण को भी आदेशित किया जाता है कि वे खाद्य | निरीक्षक द्वारा उक्त कार्यवाही किये जाने हेतु आवश्यकतानुसार सहयोग प्रदान करें।