ओबीसी एडवोकेट्स वेल्फेयर एसोसिएशन की याचिका पर हाई कोर्ट ने फैसला,आदेश के लिये प्रकरण रिजर्व किया

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शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्तियों मे आरक्षण नियमो को लागू करने हेतु दायर याचिका कर्मांक WP/19492/2020 की सुनवाई कर फैसले/आदेश हेतु प्रकरण रिजर्व किया हाईकोर्ट ने।

संविधान लागू होने की दिनांक से आज दिनांक तक, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट मे अधिवक्ताओ मे से एक भी जज एससी & एसटी का नियुक्त नही हुआ है

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी वर्ग के अधिवक्ताओ को मौका दिया बहस करने का हाईकोर्ट ने।

सरकार द्वारा की जाने वाली समस्त शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियों में ओबीसी को 27% एससी को 16% एसटी को 20% के नियम को लागू करने का है मामला।

स्पष्ट प्रावधानो के वावजूद भी आरक्षण नियम लागू नही किए सरकार ने, इस प्रकार का पहला मामला है प्रदेश का

{sarokaar news} – मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में यह अपने आप मे पहला मामला है जब आरक्षित वर्ग के अधिवक्ताओ को अपने हक अधिकार के संबंध मे विधायका के बनाए कानून को लागू करने हेतु हाईकोर्ट जाना पड़ा ! ओबीसी एडवोकेट्स वेल्फेयर एसोसिएशन के सचिव, रामभजन सिंह लोधी ने मध्य प्रदेश (लोकसेवा आरक्षण ) अधिनियम 1994 के प्रावधानों के अनुसार शासकीय अधिवक्ताओ की नियुक्तियों मे आरक्षण लागू करने की मांग करते हुए अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर के माध्यम से दूसरी बार याचिका दाखिल की गई है !

पहली याचिका WP 7660/2020 मे हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देशित किया था की उक्त नियुक्तियों मे आरक्षण नियम लागू करने पर बिचार किया जाए तब हाईकोर्ट के उक्त आदेश के बाद मध्य प्रदेश शासन के विधि विभाग ने दिनांक 07/11/2020 को वेल्फेयर एसो. के नाम से चार प्रश्टीय आदेश जारी करते बताया गया था कि शासकीय अधिवक्ता का पद ‘लोक सेवक’ की परिभाषा के अंतर्गत नही आता है ! तब शासन के उक्त आदेश के विरूद्ध पुनः याचिका WP19492/2020 दाखिल की गई याचिका का प्रमुख आधार यह है कि आरक्षण अधिनियम की धारा 2 (B) तथा 2 (F) मे स्पष्ट रूप से शासकीय सेवक एवं स्थापना को परिभाषित किया गया है जिसके तहत प्रदेश का एडवोकेट् जनरल आफिस सहित जिला न्यायालयों मे शासकीय अधिवक्ताओ के आफिस धारा 2 (एफ़) के तहत कवर है एवं प्रदेश के समस्त प्रकार के शासकीय अधिवक्ताओ के पद स्वीकृत है एवं उन्हें प्रदेश की संचित निधि से भुगतान किया जाता है जिससे अधिनियम की धारा 4(2) के प्रावधान लागू करने सरकार बाध्य है !

आज दिनांक 6/3/2022 को उक्त प्रकरण की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल द्वारा की गई माननीय कोर्ट को स्पष्ट रूप से बताया गया कि शासकीय अधिवक्ताओं की नियुक्ति मे आरक्षण अधिनियम 1994 के प्रावधान पूर्णत लागू होना चाहिए, यदि उक्त भर्ती कंटेक्ट वेसिस पर है तब भी नियम लागू होंगे ! विगत 30-35 वर्षो से हाईकोर्ट जजों के रूप मे वर्ग एवं परिवार विशेष के ही हाईकोर्ट जज नियुक्त किए जा रही है, संविधान लागू होने की दिनांक से आज दिनांक तक, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट मे एक भी जज एससी & एसटी का नियुक्त नही हुआ है इसका प्रमुख कारण शासकीय अधिकतों के रूप में इस वर्ग के योग्य अधिवक्ताओ को कभी मौका ही नही मिल पा रहा है की वो अपनी काबलिएत कोलेजियम को प्रदर्शित कर सके ! लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने उक्त याचिका को आदेश /फैसला हेतु रिजर्व रख लिया है ! याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक शाह, उदय कुमार, अशोक कुमार चौरसिया, परमानंद साहू, ओमप्रकाश पटेल, प्रशांत चौरसिया, नरेश कोरी, रूप सिंह मरावी ने पक्ष रखा !