जल संकट से निपटने केन का पानी पन्ना लाना होगा : गुड्डू

केन-बेतवा लिंक परियोजना स्वार्थपरक राजनीति का हिस्सा

केन-बेतवा लिंक परियोजना हमारे संसाधनों से हमें वंचित करने का प्रयास, हम कभी सफल नहीं होने देंगे

पन्ना – {sarokaar news} प्रदेश के अति पिछड़े पन्ना जिला में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। मानसून आ चुका है लेकिन बारिश नहीं हो रही है इससे आमजन के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। जल संकट से निपटने के लिए हमारे नाकाफी प्रयासों ने परिस्थितियों को और खराब कर दिया है। लोगों को पीने के पानी की उपलब्धता लगातार घटती जा रही है, प्राकृतिक जल स्रोत मानवीय उपेक्षा को साफ तौर पर बयां कर रहे हैं। सिकुड़ता जंगल,उपेक्षित जल स्रोत और बढ़ती आबादी ने हमें जल संकट के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। आज हमें जल संकट से निपटने के लिए स्थाई रूप से इस समस्या का हल खोजना होगा ताकि भविष्य में नगरवासियों को जल संकट से दो-चार ना होना पड़े, इसके लिए हमें केन नदी का पानी पन्ना लाना ही होगा।

उक्त विचार कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता नीरज तिवारी [गुड्डू] ने व्यक्त करते हुए कहा है कि केन बेतवा लिंक से पन्ना को किसी प्रकार का फायदा नहीं होने वाला है तथा केन बेतवा लिंक परियोजना स्वार्थपरक राजनीति का हिस्सा है और इसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जाना चाहिए। पन्ना में नेशनल पार्क के चलते उद्योग धंधों का पहले ही अभाव है। स्वार्थ सिद्धि करने वाले राजनेताओं द्वारा केन-बेतवा लिंक परियोजना बनाकर पन्ना को ठगा जा रहा है।

श्री तिवारी ने बताया कि इस परियोजना से हमारी जीवनदायिनी नदी के अस्तित्व पर प्रश्न खड़े हो रहे हैं यह परियोजना पन्ना वासियों के हितों पर कुठाराघात है। इस संबंध में विगत दिनों हमने पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता राम कृष्ण कुसमरिया जी के साथ प्रदेश के मुखिया कमलनाथ से मिलकर पन्ना जिला में उत्पन्न हो रहे जल संकट और उसके निदान के लिए केन नदी का पानी पन्ना वासियों को मिले इसके लिए मुख्यमंत्री को पत्र सौंपा है। मुख्यमंत्री द्वारा आश्वस्त किया गया है कि पानी लाने के लिए सर्वे कराकर इस योजना पर आगे कम किया जा सकता है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता धीरज तिवारी ने बताया कि केन नदी एकलौती ऐसी नदी है जिसका पानी संसार की अन्य नदियों की अपेक्षा साफ और स्वच्छ है। पन्ना जिले के प्राकृतिक संसाधनों पर सिर्फ और सिर्फ पन्ना वासियों का अधिकर है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के नाम पर हमारे संसाधनों से हमें वंचित करने का प्रयास हम कभी सफल नहीं होने देंगे।

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