एनसीएचआरओ जिग्नेश मेवाणी की गिरफ्तारी की निंदा करता है

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एनसीएचआरओ ने जिग्नेश मेवाणी की गिरफ्तारी की निंदा की: कहा कि नफरत भरे भाषणों पर मुकदमा नहीं चलाया जाता है जबकि ट्वीट से गिरफ्तारी हो जाती है

{sarokaar news} – देश के मौजूदा दौर में सरकार की आलोचना करना अपराध माने जाने लगा है। सरकार समर्थित अनगिनत संगठन और उसके लोग आये दिन देश में नफरत फैलाकर संविधान की अवहेलना कर रहे हैं और ऐसे लोगों को सरकार का समर्थन हासिल है। सरकार अपने विरोध में उठने वाली आवाजों को दबाने लिये हर हथकंडा उपयोग कर रही है इसका ताज़ा उदाहरण है जिग्नेश मेवानी की गैरकानूनी गिरफ्तारी। दलित नेता जिग्नेश मेवानी की गिरफ्तारी पर मानवाधिकार संगठन नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO) के राष्ट्रीय सचिव एडवोकेट अंसार इंदौरी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा है कि………

20 अप्रैल को, दलित राजनेता जिग्नेश मेवाणी को असम पुलिस ने एक ट्वीट के लिए गिरफ्तार किया था जिसमें उन्होंने लिखा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नाथूराम गोडसे को भगवान मानते हैं।

प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट भावना काकोटी द्वारा कई शर्तों के साथ जमानत मिलने के बाद उन्हें वापस कोकराझार जेल ले जाया गया।

हालांकि, एक महिला अधिकारी पर “हमले” और लोक सेवक को कर्तव्य के निर्वहन से रोकने से संबंधित एक अन्य मामले में असम के पड़ोसी बारपेटा जिले से पुलिस ने मेवानी को फिर से गिरफ्तार कर लिया।

पहला मामला स्पष्ट रूप से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला था। जहां नफरत भरे भाषण देने वाले लोग खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं जिग्नेश मेवाणी जैसे अन्य लोगों को प्रधान मंत्री की आलोचना करने वाले ट्वीट्स के लिए जेल में डाल दिया जा रहा है।

मानवाधिकार संगठन नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO) जिग्नेश मेवाणी की गिरफ्तारी की निंदा करता है।

जहां तक दूसरे मामले की बात है, निष्पक्ष सुनवाई होनी चाहिए और राजनीतिक प्रतिशोध न्याय के रास्ते में नहीं आना चाहिए।