एनसीएचआरओ ने सांप्रदायिकता के विरोध प्रदर्शन में भाग लिया

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{sarokaar news} – देश में सत्ता प्रायोजित साम्प्रदायिकता बढ़ रही है इससे देश के बहुत बड़े तबके जिनका इस देश के संविधान पर विश्वास है वे परेशान हैं। पिछले कुछ सालों से देश में दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने की अनेकों घटनायें हुईं हैं, उन घटनाओं पर चुप्पी अथवा यह सोचकर टाल दिया गया कि यह कुछ लोगों का अतिवादी समूह है जो इस प्रकार की घटनाओं को करता है और इन समूहों से कानून निपट लेगा। देखने में कि आया कि इन घटनाओं और इन अतिवादी समूहों पर कानून का रुख बेहद लचीला साबित हुआ। हम सबने देखा मॉबलिंचिंग, और बलात्कारियों के समर्थन में तिरंगा यात्रायें हुईं और अपराधियों को फूल मालायें पहनकर सम्मानित किया गया, इसकी जितनी मुखालफत की जानी चाहिए ही उतनी नहीं की गयी और इन घटनाओं और ऐसे अपराधियों के खिलाफ तथाकथित सेकुलर राजनीतिक दलों ने आपराधिक चुप्पी ओढ़कर मौजूदा सत्ता समर्थित अपराधियों को नज़रअंदाज किया। आज बात यहाँ तक पहुंच गयी है कि देश के बहुत बड़े तबके मुसलमानों का नरसंहार करने के लिये खुले रूप से एलान किया जाने लगा है उनके धार्मिक स्थलों को अपवित्र किया जा रहा है। हर रोज़ देश के किसी न किसी कोने से समाज विशेष के लोगों को लेकर जहरीले बयान जारी हो रहे हैं। उनको उकसाया जा रहा है और उनकी प्रतिक्रिया पर सरकार पूरी तरह से निरंकुश होकर उनके घरों को तोड़ रही है और उन्हें ही अपराधी घोषित कर जेलों में डाल रही है। उत्तर प्रदेश के बाद यह गैरकानूनी चलन मध्य प्रदेश में सत्तासीनों द्वारा लागू किया जा रहा है। सरकार का संरक्षण प्राप्त होते ही प्रदेश की पुलिस पूरी निरंकुशता के साथ नागरिकों के अधिकारों का दमन कर रही है और ऐसे लोगों को भी दंगे का अपराधी बना रही है जो पहले से जेल में हैं। 2005 में जिस व्यक्ति के दुर्घटना में दोनों हाथ कट गये पुलिस ने उसे पत्थरबाज घोषित एक मात्र आय की साधन उसकी दुकान तोड़ दी। देर से ही सही लेकिन केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली अब देश के प्रबुद्ध नागरिकों सहित आम नागरिकों को भी समझ आने लगी है। देश के प्रबुद्धजनों सहित राजनीतिक दल भी सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि अब बस बहुत हो गया इसको यहीं रोक दिया जाए अन्यथा इसके दूरगामी परिणाम देश की तरक्की के लिये घातक साबित होंगे।

देश की मज़बूती और तरक्की के लिये देश में शांति व्यवस्था और कानूनराज की अत्यंत आवश्यकता है और यह हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश और समाज को आगे ले जाने में अपना योगदान दे और देश में घट रही संविधान विरोधी घटनाओं का विरोध कर एक जिम्मेदार नागरिक होने का सबूत पेश करे। हमेशा की तरह मानवाधिकार संगठन नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO) 16 अप्रैल, 2022 को बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ जंतर मंतर पर संयुक्त विरोध प्रदर्शन में भाग लिए और पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाई। इस संबंध में एनसीएचआरओ दिल्ली कोर्डिनेटर ईशू जायसवाल ने प्रेसनोट जारी करते हुये कहा है कि………

16 अप्रैल, 2022 को बढ़ती सांप्रदायिकता के खिलाफ जंतर मंतर पर एक संयुक्त विरोध प्रदर्शन किया गया। विरोध सांप्रदायिक सद्भाव के समर्थन में और सांप्रदायिकता के पीड़ितों के प्रति एकजुटता दिखाने के लिए भी था।

मानवाधिकार संगठन नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO) विरोध में शामिल हुआ। विरोध में AISA, KYS, MSD आदि सहित कई राजनीतिक संगठनों की उपस्थिति देखी गई।

हम दोहराते हैं कि सांप्रदायिक राजनीति और मुस्लिम विरोधी माहौल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भाजपा की मुस्लिम विरोधी राजनीति जगजाहिर है और हमारा विरोध तब तक जारी रहेगा जब तक हम भाजपा द्वारा चलाई जा रही नफरत की राजनीति को खत्म नहीं कर देते।