एनसीएचआरओ ने तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार की गिरफ्तारी के विरोध में भाग लिया

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{sarokaar News} – पीड़ितों लिये न्याय की लड़ाई लड़ना और उनके साथ खड़े होना मौजूदा सरकार को इतना नागवार गुजरा कि मानवाधिकारों के लिए संघर्षरत तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस अफसर आर.बी. श्रीकुमार को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। काबिलेगौर है कि 2002 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे तथा दंगों को लेकर उनकी भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं। तत्कालीन प्रधानमन्त्री अटलबिहारी बाजपेयी ने उन्हें राजधर्म निभाने की नसीहत की थी। दंगों के दौरान गुलबर्ग सोसायटी में जकिया जाफरी के पति सहित 69 लोगों कोई भीड़ ने निर्ममता पूर्वक मार डाला था। इस लड़ाई को जकिया जाफरी लम्बे समय से लड़ रहीं है यह अलग बात ही कि उन्हें न्याय नहीं मिल सका। उनकी लड़ाई में एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ मदद कर रहीं थीं। सर्वोच्य न्यायालय ने जैसे ही इस प्रकरण में फैसला सुनाया सरकार ने फ़ौरन एक्टिविस्ट तीस्ता सीतलवाड़ और पूर्व पुलिस अधिकारी आर.बी. श्रीकुमार को गिरफ्तार कर लिया। उनकी गिरफ्तारी पर जंतर मंतर पर कई राजनीतिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया गया। मानवाधिकार संगठन नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO) ने प्रदर्शन में भाग लेते हुये एनसीएचआरओ समन्वयक ईशू जायसवाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये कहा है कि………

जब राज्य लोगों पर शिकंजा कसेगा तो हम मूकदर्शक के रूप में खड़े नहीं होंगे, हाल ही में तीस्ता सीतलवाड़ और आर.बी. श्रीकुमार की गिरफ्तारी के विरोध में 27 जून, 2022 को दिल्ली के जंतर मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया गया था।

गुजरात में 2002 के मुस्लिम विरोधी दंगों के बारे में उनके द्वारा दायर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपना फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया था।

उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में कई धाराएं लगाई गई हैं। उनकी गिरफ्तारी स्पष्ट रूप से न्याय के लिए आवाज उठाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए एक संदेश है कि हिंदुत्व भाजपा सरकार उनके बाद आएगी।

कई राजनीतिक संगठनों ने विरोध में भाग लिया और एक संदेश भेजा कि जब राज्य लोगों पर शिकंजा कसेगा तो हम मूकदर्शक के रूप में खड़े नहीं होंगे।
हम तीस्ता सीतलवाड़ और आरबी श्रीकुमार के साथ खड़े हैं।