दिल्ली – {sarokaar news} देश में सरकारों ने विरोध के स्वर कुचलने के लिये समय – समय पर कई ऐसे कानून बनाये हैं जो लोकतांत्रिक ढांचा में फिट नहीं बैठते हैं। इन कानूनों के लागू होने के बाद नागरिकों को जमकर प्रताड़ित किया गया और थोड़े समय के बाद ही इस अलोकतांत्रिक कानूनों के दुष्परिणाम जब सामने आये तो बुद्धिजीवियों और मानवाधिकारों के पैरोकारों ने इसका विरोध कर पीड़ितों की आवाज़ बुलंद करते हुये अलोकतांत्रिक कानूनों के भयावहता से आमजन को अवगत कराया। मूवमेंट अगेंस्ट यूएपीए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़ नामक संगठन ने यूएपीए और अन्य ऐसे कानूनों पर एक पुस्तक का विमोचन किया है। एनसीएचआरओ समन्वयक, ईशू जायसवाल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुये बताया है कि………

मूवमेंट अगेंस्ट यूएपीए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़ नामक संगठन ने यूएपीए और अन्य ऐसे कानूनों पर एक पुस्तक का विमोचन किया है, जिसमें कानून की रूपरेखा, इसके निर्माण और उपयोग के बाद के वर्षों में इसका उपयोग के बारे में लिखा गया है। अगेंस्ट द वेरी आइडिया ऑफ जस्टिस: यूएपीए एंड अदर लॉज नाम की यह किताब का विमोचन 29 मई, 2021 को सुबह 11 बजे दिल्ली में गूगल मीट पर एक ऑनलाइन मीटिंग के दौरान किया गया। इसके अलावा, पुस्तक का विमोचन भारत के 14 अन्य राज्यों में भी उस ही दिन अलग-अलग समय पर किया गया।

दिल्ली में पुस्तक विमोचन की मीटिंग का संचालन एनसीएचआरओ के अध्यक्ष और सिटीजन्स फॉर डेमोक्रेसी के सदस्य एडवोकेट अमित श्रीवास्तव ने किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों और वक्ताओं को धन्यवाद ज्ञापन कर के मीटिंग की शुरुआत की। मूवमेंट अगेंस्ट यूएपीए एंड अदर रिप्रेसिव लॉज़ से श्री एदामना मुहम्मद अब्दुराह्मान ने फिर यूएपीए के बारे में बात की, और किस तरह से इसका इस्तेमाल और दुरुपयोग होता आया है। उन्होंने इस तरह के पिछले कानूनों जैसे टेररिस्ट एंड दिस्रप्तिव एक्ट (रोकथाम) TADA, और प्रिवेंशन ऑफ़ टेररिज्म एक्ट (पोटा) पर भी बात की।

इसके बाद, एएमयू लॉयर्स फोरम से वासिद आर. खान ने UAPA और NSA जैसे कानूनों की मदद से न्याय्पसंद कार्यकर्ताओं की कैद के बारे में बात की। उन्होंने कानून को पास करने के लिए कांग्रेस सरकार को भी लताड़ा। उन्होंने कहा कि हालांकि यह नहीं पता चल सकता है कि कांग्रेस की मंशा क्या थी जब वह कानून लायी थी, मौजूदा सरकार यानी भाजपा हर तरीके से इस कानून का दुरुपयोग कर रही है।

वसीद आर. खान के बाद, एनसीएचआरओ की दिल्ली राज्य समिति की उपाध्यक्ष सुश्री स्वाति सिन्हा ने निर्दोषों पर हमले के बारे में बात की और इन कानूनों के खतरनाक नतीजों के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कानूनों के खिलाफ प्रतिरोध जारी रहेगा चारे सरकार कितनी भी हमें दबाने की कोशिश करे। इसके बाद लॉयर्स फॉर डेमोक्रेसी के हरीश कुमार मेहरा ने पिछले 2 वर्षों से देश में चल रहे कई विरोध आंदोलनों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि यूएपीए जैसे कानून और आम तौर पर इस सरकार का रवैया इस देश की जनता के खिलाफ है।

अंत में, पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) के उपाध्यक्ष एन. डी. पंचोली ने सरकार के सत्तावादी रवैये के बारे में विस्तार से बात की। उन्होंने सीएए, किसान आंदोलन, साथ ही उत्तर पूर्वी दिल्ली में मुसलमानों के खिलाफ हुए दंगों के बारे में बात की जो पिछले साल फरवरी में हुए थे। उन्होंने बताया कि किस तरह सरकार द्वारा लोगों के लिए बोलने वाले निर्दोष कार्यकर्ताओं को प्रताड़ा जा रहा है। उन्होंने आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर्स एक्ट (AFSPA) के बारे में भी बात की, जो की सेना को अनुचित अधिकार देता है और जिसके परिणामस्वरूप मानव अधिकारों का घोर उल्लंघन हुआ है। यह एक्ट 1990 से लगातार जम्मू और कश्मीर राज्य में है और असम, नागालैंड और बड़े पैमाने पर मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश के कुछ जिलों और अरुणाचल प्रदेश के जिलों के आठ पुलिस स्टेशनों के अन्दर आने वाले उन क्षेत्रों में लागू है जो की असम की सीमा से जुड़े हुआ है।

अंत में अधिवक्ता अमित श्रीवास्तव ने सवालों और टिप्पणियों के लिए मंच खोला। इसके बाद उन्होंने उपस्थित वक्ताओं, प्रतिभागियों और मौजूद लोगों को धन्यवाद दिया और मीटिंग को समाप्त किया।