देश को वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत: डॉ.संजय श्रीवास्तव

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साझी विरासत व संस्कृति पर लगातार हो रहे हमले: डॉ. मोहम्मद आरिफ

राइज एंड एक्ट के तहत ” राष्ट्रीय एकता, शांति एवं न्याय ” विषयक तीन दिवसीय कार्यशाला का दूसरा दिन

{sarokaar news} – हमारे पूर्वजों ने जिस इतिहास को देखा उस पर हमे गर्व है लेकिन वर्तमान दौर में दिख रहे साम्प्रदायिक राजनीति, नफरत, भेद और बुनियादी समस्याओं के दौर के इतिहास को आने वाले पीढ़ियों से गर्व के साथ बता सकेंगे।
उक्त बातें वाराणसी के तरना स्थित नव साधना के प्रेक्षागृह में राइज एंड एक्ट के तहत ” राष्ट्रीय एकता, शांति एवं न्याय ” विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन डॉ. संजय श्रीवास्तव ने कही।

उन्होंने देश की साझी संस्कृति व साझी विरासत की चर्चा करते हुए कहा कि देश को वैज्ञानिक सोंच के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है और इसके लिए हमें माहौल को समझना होगा। आलोचना के बजाय सम्प्रदायवाद, निजीकरण, बाजारवाद के खिलाफ आवाज उठानी होगी। इसके लिए दूसरे पुनर्जागरण की जमीन तैयार करनी होगी। मुझे उम्मीद है कि एक न एक दिन सबेरा होगा।

कार्यक्रम के आयोजक डॉ.मोहम्मद आरिफ ने कहा कि फासीवादी ताकतों द्वारा साझी विरासत व संस्कृति पर लगातार हमले हो रहे हैं। वक्त ऐसा चल रहा है कि हम कुछ समय के लिए आपसी अंतर-विरोध को दूर रखें और सत्य के लिये संघर्ष करें तभी राष्ट्रीय एकता, शांति एवं न्याय का सपना साकार होगा।
इसी क्रम में डॉ. अंबेडकर के दर्शन व विचारों की चर्चा करते हुए सुरेश कुमार अकेला, लाल प्रकाश राही ने कहा कि अंबेडकर ने हमेशा मानव जाति की भलाई के लिये बात की। प्रतिभागी वीना भारती ने अंबेडकर, रामकृत व लालता प्रसाद, सुग्रीव यादव ने आदिवासियों, साधना यादव ने दलित समस्या, विकास मोदनवाल ने पंडित नेहरू, कमलेश कुशवाहा, संजू देवी, रणजीत कुमार ने अपने लेख में साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता पर चर्चा की।

इसके पश्चात ग्रुप चर्चा में प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर मंथन किया। शाम प्रतिभागियों द्वारा निर्देशित एक नाट्य मंचन के माध्यम से वर्तमान भारत के चित्र को दर्शाने का प्रयास किया। सांस्कृतिक संध्या में सुरेश कुमार अकेला,लाल प्रकाश राही,नाहिदा आरिफ आदि ने सामाजिक बदलाव और राष्ट्रीय एकता सम्बन्धी गीतों से रोमांच पैदा किया।

इस दौरान संजय सिंह, नाहिदा आरिफ, रामजन्म कुशवाहा,अब्दुल मजीद, अयोध्या प्रसाद, रामकिशोर चौहान, हीरावती, असलम अंसारी, विनोद गौतम, अब्दुल मजीद, अर्शिया खान, शमा परवीन, आदि मौजूद रहे।