समाजसेवी राजेश दीक्षित की पहल रंग लाई,तालाबों का होगा सीमांकन

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प्रशासनिक मिलीभगत से तालाबों की बेशकीमती जमीन पर प्लाटिंग कर बेचा जा रहा

{sarokaar news} – पन्ना, समाजसेवी राजेश दीक्षित एडवोकेट ने नगर के तालाबों में हो रहे अतिक्रमण पर चिंता व्यक्त करते हुये बताया है कि शहर में साल दर साल पानी की समस्या देखने को मिल रही है जो चिंता का विषय है। पन्ना नगर में स्थित जलस्रोतों जिसमें तालाब मुख्य हैं अगर उनका रख रखाव ठीक तरह किया जाये तो नगरवासियों को पानी की समस्या से छुटकारा मिल सकता है लेकिन देखने आया है कि प्रशासनिक स्तर पर पन्ना के तालाबों का अस्तित्व को बनाये रखने के लिये घोर उदासीनता है,लोग तालाबों की जमीन पर अवैध रूप से अतिक्रमण कर रहे हैं और प्रशासन मूक दर्शक की तरह देख रहा है। जिसका खामियाजा नगरवासियों को हर साल गर्मियों में जलाभाव के रूप में भोगना पड़ता है। एक जिम्मेदार शहरी होने के नाते यह मेरा कर्तव्य है कि शहर की धरोहरों का उचित संरक्षण किया जाये इसलिए में तालाबों के अतिक्रमण का मामला अदालत लेकर गया।

अधिवक्ता राजेश दीक्षित पन्ना

श्री दीक्षित ने बताया है कि प्रकरण क्र० 10/2017 आवेदक राजेश दीक्षित एडवोकेट बनाम अनावेदक (1) जिला दण्डाधिकारी पन्ना (2) अध्यक्ष नगर पालिका अधिकारी पन्ना (3) मुख्य नगर पालिका अधिकारी पन्ना के विरुद्ध प्रस्तुत किया था। जिसमें आवेदक ने मांग की थी कि पन्ना जिला के समस्त तालाबों पर व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण किया जा रहा है, तालाब सिकुडते जा रहे हैं तथा उन तालाबों में व्यक्ति खुले में शौच क्रिया करते हैं तथा मवेसी नहाते हैं व नाली आदि का गंदा पानी इन तालाबों में आकर मिलता है, जिस कारण तालाबों का स्वच्छ जल प्रदूषित होता है, जल में अवशिष्ट पदार्थ मिलते हैं। __ तालाबों का अस्तित्व बचाया जावे, तालाबों का सीमांकन कर पक्के आर.सी.सी. के सीमा चिन्ह बनाये जावें व तालाबों में बाढ़ लगायी जावे। जिस पर संज्ञान लेकर श्री अनुराग द्विवेदी अध्यक्ष लोकोपयोगी लोक अदालत द्वारा दिनांक 31/01/2019 को आदेश पारित किया गया कि उक्त कार्य अनावेदकगण डेढ़ माह में पूर्ण करें। । किन्तु उक्त कार्य को करने में अनावेदकगण द्वारा कोई रूचि नहीं दिखायी गयी जिस कारण अनावेदक राजेश दीक्षित एडवोकेट द्वारा अनावेदकगण के विरूद्ध दिनांक 06/12/2019 को इजराय क्र0 10/2019 प्रस्तुत की गयी जो कि वर्तमान समय में निराकरण हेतु व्यवहार न्यायाधीश पन्ना के न्यायालय में लंबित है, जिसमें आवेदक द्वारा मांग की गयी है कि अनावेदकगण माननीय न्यायालय के आदेश का पालन करने में समयावधि गुजर जाने के बाद भी असफल है, जिस कारण अनावेदकगण से क्षतिपूर्ति के रूप में 2,25,000/- रूपये प्रत्येक अनावेदकगण से कुल एकत्र राशि 6,75,000/- रूपये जमा करायी जावे, माननीय न्यायालय के आदेश दिनांक 10/02/2019 का पालन अनावेदकगण/मयूनगण से कराया जावे तथा अनावेदकगण के तन व धन आदि पर उक्त आदेश की संतुष्टि हेतु कार्यवाही की जावे। यदि फिर भी उक्त डिक्री की संतुष्टि नहीं होती है तो अनावेदकगण/मद्यूनगण (1) जिला दण्डाधिकारी पन्ना (2) अध्यक्ष नगर पालिका अधिकारी पन्ना (3) मुख्य नगर पालिका अधिकारी पन्ना को जेल/हिरासत अभिरक्षा में भेजकर डिक्री की पूर्ण संतुष्टि करायी जावे।

न्यायालय की चेतावनी के बाद सन् 1955-56 के नक्शा/खसरा के आधार पर पन्ना के समस्त तालाबों के सीमांकन का कार्य प्रारंभ हो रहा है, उक्त कार्य को राजस्व विभाग तहसीलदार पन्ना के द्वारा किया जाना है। समाजसेवी राजेश दीक्षित एडवोकेट ने पन्ना जिला के समस्त नागरिकों से अपील की है कि वह सीमांकन के समय मौके पर उपस्थित रहें। तथा सन् 1955-56 के नक्शा/खसरा के अनुसार सीमांकन को देखें उसमें त्रुटि हो तो अपनी बात रखें व तालाबों के रूप में पन्ना की जनता को प्राप्त धरोहर को सुरक्षित रखें। तालाबों के उक्त सीमांकन होने के बाद तालाबों के सीमांकन विन्दुओं पर आर.सी. सी. के कॉलम बनाये जाने हैं, ताकि उक्त कॉलम क्षतिग्रस्त न हो सकें व तालाबों का स्थायी सीमा चिन्ह अंकित हो सके।

काबिलेगौर है कि जो कार्य जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आमजन के हितों के लिये करना चाहिए था वह कार्य अदालत का सहारा लेकर समाजसेवियों को करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी के कारण जलस्रोत सूख रहे हैं और अल्पवर्षा ने जलसंकट बढ़ाया है। अगर पन्ना जिले के समस्त तालाबों का समय रहते जीर्णोद्धार कर वर्षा का जल संचय कर लिया जाये तो नगरवासियों को पानी की किल्लत से बचाया जा सकता है लेकिन प्रशासन की मिलीभगत से तालाबों पर खुलेआम अतिक्रमण कर तालाबों की बेशकीमती जमीनों पर बाकायदा प्लाटिंग कर बेचा जा रहा है।