पन्ना – {sarokaar news} कठिनाइयों को पार कर सफलता को हासिल किया जा सकता है इसका जीता जागता उदाहरण हैं युवा अब्दुल हमीद कादरी। जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से आज सैकड़ों लोगों को रोजगार दे रहे हैं और युवाओं के लिये प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। बेहद मृदुभाषी और हमेशा लोगों की मदद को तत्पर रहने वाले इस युवा ने ज़िन्दगी की तमाम मुश्किलों को हराकर खुद को स्थापित करते हुये सफलता के झंडे गाड़ दिये हैं।

मध्य प्रदेश के सतना जिला के रहने वाले अब्दुल हफीज कादरी ने सफलता पाने के लिये बिना संकोच मेहनत मज़दूरी से लेकर कई तरह के कार्य किये और अंत में उन्होंने अपनी कंपनी शुरू कर अपने जैसे सैकड़ों लोगों को काम देकर उनकी ज़िन्दगी को बदल दिया। श्री कादरी अपनी मेहनत और लगन से जीरो से हीरो कैसे बन गये, यह जानने के लिये जब उनकी ज़िन्दगी के भीतर झांक कर देखा तो पता चला कि इस शख्स ने अपनी ज़िंदगी की कठिनाइयों से मज़बूती के साथ मुकाबला करते हुये यहाँ तक का सफर पूरा करते हुये अपने जैसे सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के साथ पूरा किया है। सतना शहर के जवाहर नगर सिंचाई विभाग के पीछे रहने वाले अब्दुल हफ़ीज़ कादरी आज खुद की सॉफ्टवेयर कंपनी चलाते हैं।

श्री कादरी का जन्म 30 जून 1990 को जवाहर नगर में हुआ। इनके पिता अब्दुल रहीम पेशे से ड्राइवर थे। दो बड़ी बहन और एक बड़े भाई के बाद अब्दुल हफ़ीज़ और इनसे छोटे एक भाई और बहन। पिता की कमाई कुछ खास नहीं थी इसलिए परिवार आर्थिक तंगी और गरीबी से जूझ रहा था। जब अब्दुल हफ़ीज़ की उम्र 7 साल हुई तो इस बालक ने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए बालश्रम करना शुरू कर दिया। उस समय धवारी के ईट भट्टा में 3 रुपये रोज की मजदूरी से जीवन की शुरुआत हुई। इसके बाद प्रियदर्शिनी में स्टाल लगाने से लेकर लोगों का मनोरंजन करने तक हर वो काम किया जिससे चार पैसे कमाए जा सकें और परिवार की मदद हो सके।

धीरे धीरे वक्त बीतता गया और जीवन के कठिन भरे रास्ते बालक हफ़ीज़ को चुनौतियां देते रहें। लेकिन इस बालक ने कभी उफ्फ तक न किया। कभी बाजार में फुग्गे बेचा तो कभी मोटरसाइकिल की दुकान में मिस्त्री बन गया। परिवार के बोझ तले बचपन ऐसे दब गया कि 10वीं के बाद स्कूल की पढ़ाई भी छूट गई।
तब तक ये बालक किशोर अवस्था मे पहुँच चुका था। तब इन्होंने छोटी सी बैटरी की दुकान खोली और सतना, पन्ना, रीवा जिले के विभिन्न इलाकों में जाकर पुरानी बैटरी खरीदने का काम शुरू कर दिया।

अभी जिंदगी हिचकोले खा ही रही थी कि एक दिन एक व्यक्ति ने सहारा बीमा कंपनी में एजेंट बनने का सुझाव दे दिया। सन 2009 से 2011 तक अब्दुल हफ़ीज़ ने सहारा एजेंट के रूप में काम किया। लगन और मेहनत की वजह से इन्होंने वहां भी सफलता के झंडे गाड़ दिए। यही वजह है कि जल्द ही भारतीय जीवन बीमा निगम मैं इन्हें बतौर LIC Agent काम करने का मौका मिल गया और फिर इन्होंने वहां भी सफलता हासिल की। सन 2011 से 2013 तक अपने ब्रांच व डिवीज़न में नंबर 1 पर ही रहे।

कहते हैं किस्मत कब कहां बदल जाए किसी को पता नहीं चलता। इस जिंदगी के आपाधापी के बीच सन 2013 में अब्दुल हफ़ीज़ को एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करने का मौका मिला। जिसके बाद हफ़ीज़ ने पीछे पलटकर नहीं देखा।
रात दिन बराबर मेहनत करके श्री कादरी ने अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी को देश की नंबर वन सॉफ्टवेयर कंपनी में बदल दिया। आज उसी परफ़ेक्ट सॉफ्टवेयर कंपनी ने श्री कादरी को मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और राजस्थान राज्य का रीजनल हेड नियुक्त कर दिया है। इतना ही नहीं गरीब बच्चों की मदद करने के उद्देश्य श्री कादरी ने PGI ऑफ इंडिया के नाम से अपनी खुद की कंपनी रजिस्टर्ड कराई और फिर लोगों को जॉब देना शुरू कर दिया।
कल तक जो बालक 3 रुपये के लिए ईट भट्टा में जाकर मजदूरी कर रहा था आज उस बालक के पास खुद का घर, गाड़ीयां, बैंक बैलेंस सब कुछ है।
वर्तमान समय में श्री कादरी के अधीन मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ में डेढ़ सौ से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं । अकेले सतना में तीन ऑफिस संचालित है जिनमें लगभग 100 लोगों को रोजगार मिला हुआ है और लोगों का परिवार चल रहा है।

अब्दुल हफ़ीज़ कादरी अपनी इस सफलता के पीछे अपनी लगन और मेहनत को तो मुख्य वजह बताते हैं लेकिन उनका कहना है कि इस सफलता के पीछे मेरे माता पिता और गुरु के आशीर्वाद के कारण यह संभव हो पाया है। श्री कादरी कहते हैं कि मेरा लक्ष्य है कि अगले 1 वर्ष के भीतर एक हज़ार जरूरतमंद लोगों को अपनी कंपनी में जॉब देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है इसके लिये हम सतत प्रयासरत हैं।