सुप्रीम कोर्ट के आदेश का नहीं हो रहा पालन

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शहर में संचालित बारातघरों में आधी रात बज रहे डीजे

शहरियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण में पुलिस नाकाम

{sarokaar news} पन्ना – शहर में कानफोड़ू कर्कस ध्वनि से बजते डीजे आमजन के स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल रहे हैं। ध्वनि प्रदूषण को पर्यावरण प्रदूषण के रुप में पर्यावरण को बड़े स्तर पर हानि पहुंचाने वाले तत्वों के रुप में गिना जाता है। यह जंगली जीवन, पेड़-पौधों के जीवन और मनुष्य जीवन को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित करता है। हमारे कान एक निश्चित दर की आवाज़ को कानों को बिना कोई हानि पहुंचाये स्वीकार करते हैं। हालांकि, हमारे कान नियमित तेज आवाज को सहन नहीं कर पाते और जिससे कान के पर्दें खराब हो सकते हैं जिसके परिणाम स्वरूप स्थायी अथवा अस्थायी रुप से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। इसके अलावा तेज़ ध्वनि से और भी कई परेशानी होती हैं जैसे: अनिद्रा, कमजोरी, तनाव, उच्च रक्तदाब इत्यादि। ध्वनि प्रदूषण एक बहुत बड़ी समस्या है जो आपके बच्चों के ऊपर बहुत ही खतरनाक दुष्प्रभाव डालती है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पर्यावरणविद राजेश दीक्षित पन्ना

इस शोरगुल पर अंकुश कगाने के लिये जागरूक शहरियों द्वारा जब आवाज उठाई जाती है तो कानून के रक्षक कानून तोड़ने वालों के साथ खड़े नज़र आते हैं।
शहर के जाने माने अधिवक्ता और पर्यावरणविद राजेश दीक्षित ने किशोरगंज में स्थित बारातघर लवकुश वाटिका में देर रात तकरीबन 1 बजे बज रहे डीजे की शिकायत 100 डायल पर की गई। शिकायत पर डायल 100 वाहन संबंधित स्थान पर पहुचता है किंतु एफ.आर.व्ही. वाहन मे उपस्थित पुलिसकर्मियों द्वारा उक्त डीजे पर कार्रवाई किये बिना वपस चली जाती है। इसके बाद रात्रि लगभग 3 बजे अधिवक्ता राजेश दीक्षित द्वारा पन्ना कोतवाली पहुंचकर ध्वनि प्रदूषण फैलाकर लोगों की नींद खराब कर रहे डीजे पर कार्रवाई करने की लिखित शिकायत की है।

श्री दीक्षित लंबे समय से पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर सजग है और समय समय पर पर्यावरण के संरक्षण लिये काम करते रहे हैं तथा पन्ना टाईगर रिज़र्व से जुड़े रहे हैं। उन्होंने देर रात नियम विरुध्य बज रहे डीजे की पूरे घटनाक्रम की फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करते हुये संबंधितों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

ध्वनि प्रदूषण पर क्या कहता है कानून –

सर्वोच्च न्यायालय ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर 2005 में पारित आदेश में कहा है कि रात्रि के दस बजे से सुबह छह बजे तक लाउडस्पीकर या किसी वाद्य यन्त्र के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण फैलाना IPC का धारा 268,290 और 291 के तहत दंडनीय अपराध है। CrPC का धारा 133 के तहत कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा ध्वनि प्रदूषण को भी (Public Nuisance) मानकर इसे रोकने का आदेश दिया जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि रात्रि 10 बजे से लेकर सुबह 6 बजे तक ध्वनि प्रदूषण फैलाना भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 के तहत उन सभी के जीने के मौलिक अधिकार का हनन है जो रात्रि में इन अवधियों के दौरान शांति चाहते हैं।