अजयगढ़ से जिला पंचायत अध्यक्ष बनाये जाने की मांग पकड़ रही जोर

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पिछड़ा वर्ग समुदाय के सर्वाधिक जिला पंचायत सदस्य जीतने से रचना पटेल की दावेदारी मज़बूत

{Sarokaar News} – प्रदेश के पिछड़े जिला पन्ना अंतर्गत तहसील अजयगढ़ घाटी की तलहटी में बसा है जहाँ राजनैतिक रूप से पिछड़ापन रहा है। दुर्भाग्य रहा कि अजयगढ़ क्षेत्र से आज तक न तो कोई विधायक, सांसद बना है और न ही जिला पंचायत अध्यक्ष और न ही किसी राष्ट्रीय पार्टी का कोई जिला अध्यक्ष बनाया गया है। अजयगढ़ पन्ना विधानसभा में पन्ना जनपद से अधिक वोट बैंक रखता है साथ ही पन्ना से ज्यादा बूथ अजयगढ़ में है, लेकिन आज तक कोई बड़ा पद नहीं मिला।

वर्तमान में सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व से सभी को आशायें हैं कि अजयगढ़ क्षेत्र को कोई न कोई राजनैतिक रूप से प्रतिष्ठित व समान्नित पद अवश्य मिलेगा जिससे क्षेत्र के जनमानस में खुशी की लहर घाटी के नीचे तक आएगी। यदि भाजपा किसी को अवसर देती है तो अध्यक्ष पद के लिए महिला सामान्य शीट आरक्षित होने के कारण रचना पटेल बेहतर विकल्प हो सकती है।

अजयगढ़ क्षेत्र वाली नवनिर्वाचित जिला पंचायत सदस्य रचना पटेल जिन्होंने अप्रत्याशित जीत दर्ज कर कांग्रेस प्रत्यशी को शिकस्त दी है। वह सरकार से उम्मीद कर रहीं है कि अजयगढ़ वासियों को इस बार मौका देकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया जाये। इससे आने वाले चुनावों में पार्टी को लाभ होगा अथवा
अजयगढ़ क्षेत्र की उपेक्षा होने पर इसके दुष्परिणाम सत्ताधारी पार्टी भारतीय जनता पार्टी को भुगतने पड़ सकते हैं। अभी हाल में ही रचना पटेल शिवराज सिंह चौहान से मिलीं हैं कयास लगाये जा रहे हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलकर अजयगढ़ क्षेत्र की भागीदारी मांगी है।

अजयगढ़ क्षेत्र के स्थानीय नेताओं का पन्ना विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं सांसद विष्णु दत्त शर्मा से भी मांग है कि उनके क्षेत्र की बेटी को जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर नियुक्त किया जाए। पन्ना विधानसभा क्षेत्र में जो पिछड़ा वर्ग के लोगों की उपेक्षा हुई है उसकी पूर्ति हो सके।जहां पवई विधानसभा क्षेत्र से पहलाद लोधी को विधानसभा का उम्मीदवार बनाकर विधायक बनाया गया है, वही गुनौर विधानसभा क्षेत्र के पिछड़ा वर्ग के सर्वमान्य नेता राम बिहारी चौरसिया को भाजपा जिला अध्यक्ष के पद पर पदोन्नत किया गया है। राजनैतिक क्षेत्र में भाजपा पार्टी द्वारा अजयगढ़ क्षेत्र के पिछड़ा वर्ग समुदाय की उपेक्षा की गई है।जिससे घाटी नीचे के स्थानीय पिछड़ा वर्ग समुदाय के नेताओं में भारी असंतोष पनप रहा है।