पन्ना – {sarokaar news} पानी की समस्या से बेपरवाह नगर पालिका प्रशासन के कारण आगामी महीनों में नगरवासियों को पानी की समस्या से जूझना पड़ सकता है। नगर के अधिकाँश जल स्रोतों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं है और अगर समय रहते नगर पालिका द्वारा उचित कदम नहीं उठाये गए तो कोरोना संकट के साथ साथ पानी की समस्या से जूझना तय है। पर्यावरणीय बदलाव के कारण साल दर साल गर्मी विकराल रूप लेती जा रही है इससे जल स्रोत जल्दी सूख जाते हैं और हर साल पानी की समस्या बढ़ती जा रही है जो मानव जीवन को प्रभावित कर रही है।

मानव सभ्यता के विकसित होने में कुआँ,तालाब और बावड़ियों का बहुत बड़ा योगदान रहा है क्योंकि जल के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। मानव जीवन को समृद्ध करने के लिए राजा महाराजाओं ने अपने समय में कई ऐतिहासिक कुआँ,तालाब और बावड़ियों का निर्माण कराकर आमजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए सार्थक प्रेस किये थे। पुराने समय के सैकड़ों कुआँ,तालाब और बावड़ियां आज भी अपनी महत्वता की कहानी कहते देखने को मिल जायेंगे यह अलग बात है कि रख रखाव के अभाव में यह प्राचीन जल स्रोत जर्जर हो चुके हैं।

दरअसल हम अपनी पीढ़ी को जलस्रोतों की महत्वता को समझाने में पूरी तरह से नाकाम रहे हैं और यही कारण है कि हमारे बच्चे समझते हैं कि हमें पानी नल से मिलता है। देश के हर शहर गांव कस्बों में कुआँ,तालाब और बावड़ियां देखने को मिल जायेगीं तथा कई कुआं आज भी लोगों की प्यास बुझा रहे हैं इसके बाद भी आमजन सहित प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होकर अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।

ऐतिहासिक तोशाखाना कुआं रखरखाव के अभाव में अपना अस्तित्व खोता जा रहा है

पन्ना शहर में मनहर महिला समिति के बगल में स्थित तोशाखाना कुआँ की बात करें तो कभी शहरवासियों की एक बड़ी संख्या को पीने का शुद्ध पानी देता था और सैकड़ों लोगों की जरुरत को पूरा करता था किंतु लगातार उपेक्षित रहने के कारण यह कुआं भी अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। अतिक्रमणकारियों द्वारा कुआं के जगत कब्ज़ा जमा लेने तथा सामने दुकानों के निर्माण के कारण यह कुआं पीछे चला गया है और धीरे धीरे लोगों की स्मृति से भी गायब होता जा रहा है। अभी भी हर साल भीषण गर्मियों में जब नालों से पानी आना बंद हो जाता है तब लोगों को जल स्रोतों की याद आती है और लोग इस कुयें का पानी का उपयोग तो करते हैं लेकिन इसकी जर्जर तथा इसके रख रखाव की चिंता नहीं करते हैं।

दुकानों के पीछे चले जाने के कारण लोगों ने कुयें पर अघोषित मूत्रालय बन लिया है और शाम को शराबियों का उपयुक्त अड्डा में तब्दील हो चुके इस कुएं में अभी भी बड़ी मात्रा में पानी की उपलब्धता है किंतु आस पास फैली गन्दगी ने पानी को दूषित कर दिया है। शासकीय मनहर कन्या शाला सहित मनहर महिला समिति द्वारा पम्प लगाकर पानी का उपयोग किया जा रहा है। स्कूलों में सप्लाई हो रहे गंदे पानी से छात्र छात्राओं को संक्रमण का खतरा होने के बाद भी स्कूल द्वारा कुयें की साफ़ सफाई का अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया है जो चिंता का विषय का है।

यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन शहर के जल स्रोतों को चिन्हित कर उनका जीर्णोद्धार कर दे तो हर साल जल संकट से जूझते गर्मियों में शहरवासियों को जल संकट से नहीं जूझना पड़ेगा।