इतिहास के परखच्चे उड़ाने वाले ये लोग..

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भोपाल – {sarokaar news} राजा भोज की नगरी एक नए इतिहास के साथ आगे बढ़ रही है…! कलम घीस्सुओं (चाटुकारी के माहिर कलमकारों) ने जब जब मौका मिला, अपनी मफाद परस्ती से सराबोर होकर कलम चलाई और हकीकी तवारीख पर कालिख पोतने में कोई कसर नहीं छोड़ी…! लालघाटी पर खून की नदियां बहा दी गईं तो शहीद गेट से वास्तविक शहादत देने वालों के नाम विलोपित कर दिए गए…! ईमामी गेट अग्रसेन चौक और पीर गेट सोमवारा चौराहा करार दे दिया गया…! टीला जमालपुरा कब टीला रामपुरा हो जाता है, किसी को खबर नहीं…! बदलाव की जद में हमीदिया से लेकर सुल्तानिया जनाना अस्पताल तक हैं, सदर मंजिल पर भी जल्दी कोई नई तख्ती चढ़ने की तैयारी है…! बेनजीर की कहानी खत्म है और इकबाल मैदान को भी खिरनी के साथ किसी नए नाम से पुकारा जाए तो कोई आश्चर्य नहीं…!
बात भोपाल की आखिरी शासक को लेकर चल रही है। उनके साथ हुए अन्याय और ज्यादतियों पर पन्ने उभरकर आने लगे हैं। अपनों से मिली दगा से लेकर मजबूरी की इंतेहा तक पहुंच कर जान दे दिए जाने की बात कही जा रही है…! कहा जाने लगा तो कहने वाले ये भी बयां करने लगे कि रानी साहिबा का वास्ता भोपाल की बजाय गिन्नोरगढ़ से हुआ करता था…! गिन्नौरगढ़ के गोंड राजा निजाम शाह की सातवीं पत्नी और उनकी पटरानी को अपने पति के भतीजे की बदनीयत और बगावत के चलते भोपाल आकर शरण लेना पड़ी थी…! जिस दोस्त को आज रानी साहिबा की कहानी का विलेन करार दिया जा रहा है, उसने ही रानी साहिबा को बतौर बहन इज्जत और संरक्षण दिया था…! रहने के लिए महल भी बनाकर दिया और रानी साहिबा के दुश्मनों को खदेड़ने के लिए गिन्नौरगढ़ पर हमला भी किया था…!
इतिहास किसका लिखा, किसका बयान किया हुआ दुरुस्त है, ये खोज का विषय है…! लेकिन मौजूदा पीढ़ी के सामने परोसी गईं दो कहानियों में से शायद एक कालांतर में विलपित हो जाए, हाथों में शायद वही दस्तावेज बाकी बचें, जो खुराफात के साथ मस्तिष्क पर चस्पा कर दिए गए हैं, किए जा रहे हैं और किए जाने की सतत प्रक्रिया में शामिल रहने वाले हैं….!

पुछल्ला
लंगोटी वालों पर मेहरबानी

तुम साला लंगोटी वाला, न बदला है न बदलेगा…! कहते कहते अचानक सबकी किस्मत बदलने का बीड़ा उठा लिया गया है…! बदलाव किसका होता है, विकास किसका होता है, ये काल के गर्त में छिपा हुआ है। फिलहाल तो कल तक मंदिर की सीढ़ियों से दूर रखे जानी वाली जमात को भगवान का दर्जा दिया जाना भी किसी ईश्वरीय चमत्कार से कम नहीं है।वरिष्ठ पत्रकार, आशु खान भोपाल