अभिभावक की असहमति के बाद भी छात्रा का टीकाकरण

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{sarokaar news} – मध्य प्रदेश – कोरोना वायरस से बचाव केलिये सरकार द्वारा नागरिकों का टीकाकरण अभियान वृहद रूप से चलाया जा रहा है जिसमें किशोर और किशोरियों को भी शामिल किया गया है। इसी अभियान अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमें स्कूलों में छात्र छात्राओं का टीकाकरण कर रहीं हैं। इसी अभियान अंतर्गत आज हिरण बाग़ स्कूल में स्वास्थ्य विभाग की टीम किशोरियों का टीकाकरण कर रही थी तब स्कूल के हेड मास्टर ने एक छात्रा के स्थानीय अभिभावक से कोरोना वायरस के टीके लगाये जाने की जानकारी दी और अभिभावक द्वारा मना कर दिया गया। तद्पश्चात स्कूल के स्टाफ को बताया गया कि इस छात्रा के अभिभावक द्वारा टीकाकरण की अनुमति नहीं दी गयी है। इसके बाद भी स्कूल की प्रिंसिपल द्वारा उक्त छात्रा का टीकाकरण करवा दिया गया।

छात्रा के स्थानीय अभिभावक जब स्कूल पहुंचे तो उन्होंने स्कूल की कार्यप्रणाली पर नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा कि सरकार किसी भी नागरिक को जबरदस्ती टीकाकरण के लिये बाध्य नहीं कर रही है और अभिभावक की फोन पर असहमति के बाद भी आपने टीकाकरण करवा दिया। इस समूचे प्रकरण को सोशल मीडिया में वायरल कर स्कूल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये गये हैं।

बताते चलें कि छात्रा के स्थानीय अभिभावक राजेश दीक्षित शहर के जानेमाने अधिवक्ता हैं उन्होंने कहा है कि बच्चों के अभिभावक की असहमति प्रदान करने के बाद भी टीकाकरण किया जाना भारत सरकार की गाइड लाइन का खुला उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा है सरकार द्वारा अभी तक टीकाकरण को अनिवार्य नहीं किया गया है तथा नाबालिग बच्चों को उनके अभिभावक की सहमति के बिना वेक्सीनेट किया जाना तथा स्कूल में जमा दस्तावेज जिसमे बायोमेट्रिक पहचान पत्र भी शामिल है उसका स्कूल प्रबंधन द्वारा दुरूपयोग किया गया है। बच्चों के कानूनी हितों के संरक्षण लिये इस मामले को कानूनी तौर पर लड़ा जायेगा और नाबालिग बच्चों के अधिकारों को संरक्षित किया जायेगा।

इस मामले में स्कूल के एच एम ने कहा कि छात्रा के अभिभावक को वैक्सीन लगाये जाने की जानकारी गई तो उनके द्वारा मना किया गया जिसकी जानकारी स्कूल के प्रिंसिपल सहित स्टाफ को दी गई थी इसके बाद भी छात्रा का टीकाकरण करा दिया गया।

कोरोना वायरस कोरोना वायरस के टीके को लेकर केंद्र सरकार देश की सर्वोच्च अदालत में बाकायदा हलफनामा दाखिल कर साफ़ कह चुकी है कि भारत सरकार और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की और से जारी दिशा निर्देश संबंधित व्यक्ति की सहमति प्राप्त किये बिना जबरन टीकाकरण की बात नहीं कहते हैं। केंद्र सरकार ने कहा है कि किसी भी नागरिक की मर्जी के बिना उसका टीकाकरण नहीं किया जा सकता है।